गीत,कविता और कहानी |
| राशन देवत सरकार हा (तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगांव) Posted: 03 May 2021 09:45 PM PDT राशन देवत सरकार हा साग कहाँ ले लाबो... बिना तेल नून मिरी बिना भात ला कइसे खाबो... काम धाम चौपट होगे पइसा घलो सिरागे कोरोना बइरी के मारे दिन कइसन हे आगे धान झरगे बरफ के मारे तरवा कहाँ ठठाबो बिना तेल नून मिरी बिना भात ला कइसे खाबो... बंद दुकान हे जंउहर भइगे मनखे होगे हलकान लाकडाऊन ह कब रहही गउकीन सिरतो ईमान अपन पीरा ल काकर कर अब जाके गोहराबो बिना तेल नून मिरी बिना भात ला कइसे खाबो... तउवा तउवा मनखे होगे दिन हा कइसे पहाही अच्छा आही कहिथे सब कोन जनी कब आही घुना खावत ये चोला ला जिनगी कइसे पहाबो बिना तेल नून मिरी बिना भात ला कइसे खाबो... बर बिहाव हा सिट्ठा परगे लाडू के मीठ भगागे नियम कानून देख देखके दूल्हा के मति हरागे कहिथे दस झन मनखे संग दुल्हिन ला लाबो बिना तेल नून मिरी बिना भात ला कइसे खाबो... मास्क लगाले हाथ धोले डरना निही डराना निही बिन मतलब तैहर भैया घर ले बाहरी जाना निही काहत हावय तोषण हा कोविड वैक्सीन लगाबो बिना तेल नून मिरी बिना भात ला कइसे खाबो... तोषण कुमार चुरेन्द्र धनगांव डौंडी लोहारा बालोद छ.ग. |
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