गीत,कविता और कहानी |
| Posted: 28 Mar 2021 08:16 PM PDT एक बार फिर कोरोना से जंग है। फीका- फीका फागुन का रंग है। लगा भारत पर प्रतिबंध देखिये, कोई मित्र नहीं किसी के संग है। न ही कोई शोर शराबा नगर में, न शराब पीये न ही कोई भंग है। बरस बीता एक कोरोना कहर में, फिर भी देखो अंतर्मन में उमंग है। अमन व सौहार्दभाव से मिलिये, मिलकर मनाये होली सतरंग है। देवें परिचय एक्य सूत्र 'तोषण' सतत जन-जन जीवन उमंग है। तोषण चुरेन्द्र दिनकर धनगाँव डौंडीलोहारा |
| हाय रे मोर परसा के फूल (तोषण चुरेन्द्र धनगाँव) Posted: 28 Mar 2021 07:39 PM PDT होली पर्व की बधाई व शुभकामनाएं.... हाय ओ मोर परसा के फूल,मार डारे हँसाई खुले खुल हाय गा मोर सरसो के फूल,मोही डारे तोर रेंगना झूले झूल ######### फागुन महिना गोरी, उड़त हे गुलाल ओ उड़त हे गुलाल मिरगीन कस रेंगना तोरे,चेहरा लाल लाल ओ चेहरा लाल लाल हाय ओ मोर परसा के फूल........ हाय गा मोर सरसो के फूल........ ####### मँय तोर राधा रानी,किसन कन्हैया तँय किसन कन्हैया बिरिज मा होली खेलबो,जोरे जोरे बंइहा जोरे जोरे बंइहा हाय गा मोर सरसो के फूल.... हाय मोर परसा के फूल.... ####### पीरीत के रंग मा गोरी,जिनगी ला रंग डारे ओ जिनगी ला रंग डारे संग कभू छूटे नाहीं,बंधना बध डारे ओ बंधना बध डारे हाय ओ मोर परसा के फूल..... हाय गा मोर सरसो के फूल..... ###### संगे मा जिबो बइहा,संगी मर जाबोन गा संगे मर जाबोन फूल बगिया कस राजा,कुरिया बनाबोन गा कुरिया बनाबोन हाय गा मोर सरसो के फूल.... हाय ओ मोर परसा के फूल.... 🖋️🖋️🖋️🖋️🖋️🖋️🖋️ गीतकार तोषण चुरेन्द्र दिनकर धनगांव डौंडीलोहारा बालोद छ.ग. |
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